बासमती चावल: हालिया गिरावट के बावजूद बाजार में मजबूती के संकेत

पिछले करीब 10 दिनों में बासमती चावल के दामों में 5–7 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इससे पहले बाजार में 30–35 रुपये प्रति किलो तक की तेज बढ़त देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा कमजोरी को सीधी गिरावट नहीं बल्कि ऊंचे स्तर से आया तकनीकी सुधार (करेक्शन) माना जा रहा है। कीमतों के रुझान पर नजर डालें तो 1509 सेला चावल, जो सीजन के दौरान लगभग 53 रुपये प्रति किलो तक गिर गया था, तेजी के दौरान 85–86 रुपये तक पहुंच गया। अब यह घटकर 79–80 रुपये प्रति किलो के आसपास आ गया है। इसी तरह 1718 सेला चावल 87–87.5 रुपये से फिसलकर करीब 83 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रहा है। 1401 स्टीम चावल भी सीजन में 68 रुपये से बढ़कर 98–102 रुपये प्रति किलो तक गया था और फिलहाल 92–93 रुपये प्रति किलो के स्तर पर स्थिर है। इस गिरावट का मुख्य कारण ऊंचे दामों पर निर्यात मांग में कमी और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता को माना जा रहा है। दूसरी ओर आपूर्ति की स्थिति अभी भी कड़ी बनी हुई है। देश में इस वर्ष बासमती उत्पादन में औसतन 40–42% तक की कमी का अनुमान है। अक्टूबर-नवंबर के दौरान हुई बारिश से कटाई प्रभावित हुई, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर पड़ा। मंडियों में धान की आवक लगभग समाप्त हो चुकी है और राइस मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक खपत के मुकाबले कम बताया जा रहा है। रामपुर, टांडा, दोहरी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में तूरी और बासमती धान का भंडार सीमित रह गया है। वहीं हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के प्रमुख प्रोसेसिंग केंद्र—जैसे करनाल, तरावड़ी, पेहवा, अमृतसर और जंडियाला गुरु—में भी धान की सप्लाई काफी हद तक खत्म हो चुकी है। निर्यात की स्थिति देखें तो पहले से ही 7–8 सप्ताह के शिपमेंट बुक हैं, जबकि नई फसल आने में अभी करीब दो महीने का समय बाकी है। इससे बाजार में नई आपूर्ति नहीं आ रही और भौतिक उपलब्धता सीमित बनी हुई है। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह सुचारू न होने से निर्यातकों ने फिलहाल खरीद में सतर्कता बरती है, जिससे बाजार पर अस्थायी दबाव बना। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर मांग खत्म नहीं हुई है और जैसे ही वैश्विक परिस्थितियां सुधरेंगी, लंबित मांग तेजी से सक्रिय हो सकती है। मौजूदा हालात में बाजार में गिरावट के ठोस कारण नजर नहीं आते, क्योंकि न तो स्टॉक अधिक है और न ही नई आपूर्ति जल्द आने वाली है। ऐसे में कम हुए भाव पर खरीदारी की धारणा मजबूत बनी हुई है। मंडी मार्केट मीडिया के अनुसार 1121 स्टीम चावल के लिए 12,000 रुपये प्रति क्विंटल का लक्ष्य बरकरार है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही ईरान-अमेरिका तनाव कम होगा और होर्मुज मार्ग पूरी तरह सुचारू रूप से खुल जाएगा, बाजार दोबारा ऊपरी स्तर की ओर तेजी से बढ़ सकता है।

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