उत्तर भारत में प्री-मानसून आंधी-तूफान, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अलर्ट

पिछले दो दिनों में पश्चिमी विक्षोभ और उससे बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और धूल भरी आंधी देखने को मिली। इससे पहले लुधियाना, पटियाला, अमृतसर, अंबाला और करनाल में तापमान 41–42°C तक पहुँच गया था, जबकि गंगानगर, सूरतगढ़ और अनूपगढ़ में 44°C से ऊपर रहा। हाल की मौसम गतिविधियों के कारण तापमान अब कई जगहों पर 30 के ऊपरी स्तर (हाई 30s) में आ गया है, हालांकि हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अभी भी 40°C से ऊपर बना हुआ है। आने वाले सप्ताह में उत्तर भारत के बड़े हिस्से में प्री-मानसून गतिविधियां और तेज होंगी। इसके पीछे कई मौसम कारक एक साथ काम करेंगे। मध्य एशिया और उत्तर पाकिस्तान के ऊपर ऊपरी वायुमंडल में बने गहरे ट्रफ भारत के मौसम को प्रभावित करेंगे। इसके कारण मैदानी इलाकों में व्यापक स्तर पर धूल भरी आंधी और गरज-चमक वाले बादल बनेंगे। ऊंचे और मजबूत बादलों (अपड्राफ्ट) के कारण कुछ जगहों पर ओलावृष्टि की संभावना भी बढ़ जाएगी। मौसम गतिविधियां 3 मई (रविवार) से तेज होने लगेंगी। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान, धूल भरी आंधी और 60 किमी/घंटा से अधिक रफ्तार वाली हवाएं चल सकती हैं। यह मौसम एक बड़े क्षेत्र में सक्रिय रहेगा, जिससे खेती, हवाई सेवाओं, यात्रा और बाहरी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान और उड़ानों पर भी असर होने की संभावना है। ये गतिविधियां अधिकतर दोपहर और शाम के समय होंगी, जबकि सुबह का समय साफ और तापमान 35–38°C के बीच रहेगा। 4 से 7 मई के बीच मौसम अपने चरम पर होगा, विशेष रूप से 4 और 5 मई को सबसे ज्यादा असर दिखेगा। इस दौरान बिजली गिरने, तेज हवाओं, उड़ती वस्तुओं और पेड़ों के गिरने का खतरा रहेगा, इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। इस सिस्टम का असर लगभग दो दिन तक रहेगा और 10 मई के बाद ही मौसम पूरी तरह साफ होने की संभावना है। राहत की बात यह है कि मध्य मई तक लू से राहत बनी रहेगी।

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