मक्का बाजार में जबरदस्त तेजी: ₹3200 प्रति क्विंटल तक पहुंचे दाम, जानें पोल्ट्री खरीद का पूरा गणित!
देश के घरेलू मक्का बाजार में हाल के दिनों में मजबूती का रुख बना हुआ है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले माल के दाम ₹3,200 प्रति क्विंटल के स्तर को छू चुके हैं। हालांकि, बाजार में चौतरफा एकसमान तेजी के बजाय नमी, दाने की गुणवत्ता और अंतिम उपयोग के अनुसार कीमतों में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र और अन्य प्रमुख खपत केंद्रों में फीड तथा पोल्ट्री उद्योग की ओर से सूखी व प्रीमियम मक्का की लिवाली काफी मजबूत बनी हुई है, जबकि अधिक नमी वाले और साधारण माल के सौदे निचले स्तरों पर हो रहे हैं। बाजार की इस तेजी को चालू सीजन के दौरान उत्पादन में बड़ी गिरावट के अनुमानों से सीधा समर्थन मिल रहा है। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल देश में मक्का का कुल उत्पादन लगभग 232.09 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले आंकड़ों की तुलना में करीब 16.75% कम है। साथ ही, बुआई का रकबा भी 9.01% घटकर 89.06 लाख हेक्टेयर के आसपास रहने का आकलन है। मुख्य रूप से महाराष्ट्र (24.22% कमी) और कर्नाटक (33.37% कमी) जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में फसल के कमजोर रहने की आशंका से आगे चलकर आपूर्ति सुस्त रहने की संभावना जताई जा रही है। विभिन्न राज्यों की प्रमुख मंडियों में दरों की बात करें तो महाराष्ट्र के अहिर, पोयनाड़ और मुंडा में अच्छी क्वालिटी की मक्का ₹3,200 तक बोली गई, जबकि लातूर में ₹2,000 से ₹3,000 और जालना में ₹2,300 से ₹2,900 प्रति क्विंटल के भाव रहे। मध्य प्रदेश के नीमच में धानुका मक्का ₹2,675 और रतलाम में स्टॉक मक्का ₹2,500-₹2,550 के बीच रही। वहीं पूर्वी भारत के गुलाबबाग (बिहार) में मीडियम मक्का ₹2,670-₹2,720 और फाइन क्वालिटी ₹2,730-₹2,800 के स्तर पर दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में मक्का बाजार दो परस्पर विरोधी कारकों के बीच झूल रहा है। एक ओर जहां उत्पादन में कमी और पोल्ट्री, स्टार्च व एथेनॉल उद्योगों की मांग कीमतों को सहारा दे रही है, वहीं दूसरी ओर नई फसल की आवक और उसमें नमी की मात्रा अधिक होना भाव पर दबाव बना रहा है। किसान और व्यापारी अच्छी तरह सुखाए गए और गुणवत्तापूर्ण माल को रोककर बेच सकते हैं, लेकिन उन्हें आने वाले दिनों में आवक की स्थिति और महाराष्ट्र-कर्नाटक के वास्तविक फसल आंकड़ों पर भी पैनी नजर रखनी होगी।