किसानों द्वारा माल रोकने से जीरा बाजार में तेजी, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

बीते सप्ताह जीरा बाजार ने अपनी मजबूती फिर से दिखाई। प्रमुख वजह रही किसानों द्वारा माल रोकना, जिससे मंडियों में सप्लाई अपेक्षित स्तर पर नहीं बढ़ सकी। ऊंझा मंडी में इस समय आवक केवल 35-40 हजार बोरी के आसपास रही, जबकि पिछले साल इसी समय यह 50-55 हजार बोरी थी। राजस्थान की मंडियों में भी सप्लाई सीमित रही, जिससे बाजार में टाइटनेस बनी रही। भाव की बात करें तो शनिवार को ऊंझा में मीडियम क्वालिटी ₹19,500 और बेस्ट क्वालिटी ₹22,200 प्रति क्विंटल रही। जोधपुर में भाव ₹23,000, मेड़ता ₹22,500, नागौर ₹21,500 और नोखा में ₹21,000 प्रति क्विंटल रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुंबई में मीडियम क्वालिटी ₹25,500 और बेस्ट क्वालिटी ₹29,500 तक पहुंच गई। दिल्ली में मशीनकट ₹26,000 और बेस्ट क्वालिटी ₹32,000 तक बोली गई। इस सप्ताह जीरे के भाव लगभग ₹8-10 प्रति किलो बढ़कर ₹190-220 प्रति किलो तक पहुंचे, जो स्थानीय स्टॉक्स की मांग और सीमित सप्लाई का परिणाम है। वायदा बाजार में हल्की कमजोरी रही; NCDEX अप्रैल ₹22,150 (-5) और मई ₹22,345 (-45) पर बंद हुआ। इस साल जीरे की कुल बुवाई 11.18 लाख हेक्टेयर हुई, जो पिछले साल के 11.71 लाख हेक्टेयर से कम है। मौसम की प्रतिकूलता के कारण उत्पादन घटकर 88-90 लाख बोरी रहने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 97-98 लाख बोरी था। गुजरात में उत्पादन 32-34 लाख बोरी और राजस्थान में 54-55 लाख बोरी रहने की संभावना है। वर्तमान में गुजरात में आवक 60-65 हजार बोरी और राजस्थान में 22-25 हजार बोरी है, लेकिन नए माल की देरी से अप्रैल में सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। निर्यात के मामले में थोड़ा दबाव दिखा। अप्रैल-दिसंबर 2025 में निर्यात 156,671 टन रहा, जो पिछले साल के 178,847 टन से लगभग 12% कम है। यह गिरावट मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण है। हालात सुधरने पर निर्यात मांग फिर से बढ़ सकती है, जिससे बाजार को नया सहारा मिलेगा। कुल मिलाकर, इस सप्ताह जीरा बाजार में फंडामेंटल सपोर्ट मजबूत रहा, और लंबी अवधि में कीमतों में मजबूती की संभावना बनी हुई है। हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की स्थिति में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

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