कैबिनेट के पास जाएगा पीडीएस में बदलाव का प्रस्ताव, टूटे चावल 25% से घटाकर 10% करने की तैयारी

केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत वितरित अनाज में टूटे चावल की हिस्सेदारी 25% से घटाकर 10% करने के प्रस्ताव को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास ले जाने की योजना बना रही है, खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा। इस कदम से हर साल लगभग 90 लाख टन टूटे चावल एथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध हो सकेंगे। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में पिछले तीन हफ्तों में लगभग 40% की वृद्धि हुई है। चोपड़ा ने बताया कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 20% तक पहुंच गया है, जो 2013 में 1.5% था। इससे भारत को ₹1.63 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और 2014 के बाद से 277 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। उन्होंने कहा कि सरकार अब एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। 20% से अधिक मिश्रण, डीजल में एथेनॉल मिलाने और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन सम्मेलन में बोलते हुए चोपड़ा ने कहा कि यह योजना उद्योग को आपूर्ति बाधाओं से निपटने में मदद करेगी। 2023 में कमजोर चीनी उत्पादन और चावल की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के कारण डिस्टिलरीज के लिए फीडस्टॉक की आपूर्ति सीमित करनी पड़ी थी। वर्तमान में लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त वितरित अनाज में टूटे चावल की हिस्सेदारी 25% है। प्रस्ताव के तहत इसे 10% किया जाएगा और 360-370 लाख टन वार्षिक वितरण में से बचा हुआ हिस्सा नीलामी के जरिए एथेनॉल उत्पादकों और अन्य को बेचा जाएगा। इसका परीक्षण पांच राज्यों में किया जा चुका है। अगले वर्ष से FCI द्वारा डिस्टिलरीज को साबुत चावल की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी और टूटे चावल को मुख्य फीडस्टॉक बनाया जाएगा। भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 के 420 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है।

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