MSP से नीचे चना, किसानों की रोक के बावजूद सप्लाई बढ़ने के आसार
चना बाजार पिछले आठ महीनों से एक सीमित दायरे में ही कारोबार कर रहा है, जहां न तो कीमतें ₹6000 के ऊपर जा सकीं और न ही ₹5500 से नीचे आईं। बीते सप्ताह बाजार में ₹75 की तेजी देखने को मिली, जिसका कारण स्टॉकिस्टों की सक्रिय खरीद और किसानों की कमजोर बिकवाली रही। हालांकि, संभावित अधिक सप्लाई ने तेजी को सीमित रखा, और आज दिल्ली में चना ₹50 की गिरावट के साथ खुला। जैसे-जैसे सीजन अपने चरम की ओर बढ़ रहा है, आने वाले दिनों में सप्लाई का दबाव बढ़ने की संभावना है। वर्तमान में मंडियों में चने का औसत भाव ₹5200-5400 प्रति क्विंटल के बीच है, जो ₹5875 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम है। इसी कारण किसान अपनी उपज रोककर रख रहे हैं, जिससे खुले बाजार में आवक कमजोर बनी हुई है। हाल के हफ्तों में राजस्थान और मध्य प्रदेश में बारिश और ओलावृष्टि के कारण आवक प्रभावित हुई थी। इसके अलावा, त्योहारों और मार्च अंत में मंडियां बंद रहने से सप्लाई और धीमी हो गई। अब 3-4 अप्रैल से मंडियां खुलने के बाद आवक बढ़ने की उम्मीद है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सरकारी खरीद शुरू होने से किसानों ने खुले बाजार में बिक्री कम कर दी है। वहीं, राजस्थान में भी 1 अप्रैल से सरकारी खरीद शुरू होने की उम्मीद के चलते किसान माल रोककर बैठे हैं। देशी चने का कैरीओवर स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है, जिससे स्टॉकिस्ट लगातार सक्रिय खरीद कर रहे हैं। शनिवार को इंदौर, लातूर और अकोला में चना ₹5700, कटनी में ₹5750, बीकानेर में ₹5500 और मुंद्रा पोर्ट पर ऑस्ट्रेलियन चना ₹5500 पर कारोबार करता देखा गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई मजबूत बनी हुई है। मुंद्रा और कांडला पोर्ट पर ऑस्ट्रेलियन चने का स्टॉक करीब 3.14-3.27 लाख टन के बीच है, जो पिछले छह महीनों में सबसे अधिक है। साथ ही MV Ocean Ariel (34,000 टन) और MV Rubinai (36,800 टन) जैसे जहाजों के लगातार आगमन से सप्लाई और मजबूत हो रही है। आयात के आंकड़ों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2025 में 5.03 लाख टन के मुकाबले 2026 में आयात घटकर लगभग 2.52 लाख टन रह गया, यानी करीब 50% की कमी, जिससे घरेलू बाजार को सहारा मिला है। उत्पादन के मोर्चे पर प्राइवेट अनुमान करीब 93 लाख टन (+18%) का है, जबकि सरकारी अनुमान इससे अधिक 117.92 लाख टन (+6.10%) है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उत्पादन बढ़ने की संभावना है, जबकि महाराष्ट्र में हल्की गिरावट का अनुमान है। डिमांड की स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव के कारण खुदरा और थोक स्तर पर दालों की खपत में बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर, MSP और बाजार भाव के बीच बड़ा अंतर, कम कैरीओवर स्टॉक, सरकारी खरीद और मजबूत मांग ये सभी कारक बाजार को सहारा दे रहे हैं, जिससे बड़ी गिरावट की संभावना कम है। वहीं, पोर्ट पर मौजूद स्टॉक और नई फसल की आवक कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान स्तर निचले दायरे के करीब हैं और यदि भाव ₹50-100 और गिरते हैं, तो खरीदारी का मौका बन सकता है। शॉर्ट टर्म में स्टॉकिस्टों की मांग और सरकारी खरीद के चलते ₹200-300 की तेजी संभव है, जबकि दिल्ली में भाव ₹5550 से नीचे जाने की संभावना कम है। 31 मार्च को 10% आयात शुल्क समाप्त हो रहा है। यदि इसे बढ़ाया जाता है, तो बाजार को और समर्थन मिल सकता है। वहीं, यदि कीमतें ज्यादा बढ़ती हैं, तो सरकार सस्ता मटर आयात कर बाजार को नियंत्रित कर सकती है।