बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव सक्रिय, दक्षिण भारत में तेज बारिश के आसार

दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में उत्तरी श्रीलंका और तमिलनाडु तट के पास एक लो प्रेशर एरिया सक्रिय हो गया है। यह सिस्टम कोमोरिन क्षेत्र में लंबे समय से बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से विकसित हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे जुड़ा साइक्लोनिक सर्कुलेशन समुद्र तल से लगभग 20 हजार फीट की ऊंचाई तक फैला हुआ है और अगले तीन दिनों में इसके डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। इस बार मौसम प्रणाली का गठन सामान्य प्री-मानसून पैटर्न से अलग माना जा रहा है। आमतौर पर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सिस्टम अंडमान सागर के आसपास विकसित होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हैं, लेकिन यह लो प्रेशर सीधे श्रीलंका और तमिलनाडु के करीब बना है। मौसम मॉडल इसके भविष्य को लेकर अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। कुछ मॉडल इसके मजबूत होने की संभावना जता रहे हैं, जबकि कुछ इसे कमजोर पड़ता हुआ दिखा रहे हैं। यदि यह सिस्टम डिप्रेशन में बदलता है, तो इसके उत्तर दिशा की ओर बढ़ने के संकेत हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर यह और मजबूत हो सकता है। हालांकि, पिछले रिकॉर्ड बताते हैं कि इस क्षेत्र में बनने वाले अधिकतर सिस्टम तमिलनाडु या दक्षिण आंध्र प्रदेश तट को पार करने के बजाय समुद्र की ओर मुड़ जाते हैं। बाद में इनके म्यांमार या बांग्लादेश की दिशा में बढ़ने की संभावना रहती है, जबकि कुछ सिस्टम समुद्र में ही कमजोर भी पड़ जाते हैं। इस मौसम प्रणाली का असर दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों के रूप में दिखाई दे सकता है। दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बंगाल की खाड़ी में भारी बारिश की संभावना है, जबकि भूमध्य रेखा के पार से आने वाली तेज हवाएं मानसूनी प्रवाह को और मजबूत कर सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि ये परिस्थितियां दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मानसून की समय से पहले एंट्री के लिए अनुकूल साबित हो सकती हैं।

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