बढ़ी आवक से चना बाजार पर दबाव, लेकिन मजबूत मांग ने गिरावट रोकी
सोमवार को चना बाजार में मंडियों की आवक बढ़ने से बाजार पर दबाव देखने को मिला और अधिकांश बाजारों में कीमतों में करीब ₹20 प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई। राजस्थान से प्राप्त ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस सीजन राज्य में चने का उत्पादन बेहतर रहने का अनुमान है। हालांकि उत्पादन बढ़ने की खबरों के बावजूद बाजार में किसी बड़ी कमजोरी का माहौल नहीं दिखा और ज्यादातर मंडियों में भाव संतुलित बने रहे। दिल्ली बाजार में राजस्थान का बेस्ट चना ₹5555 प्रति क्विंटल पर कारोबार करता रहा, जबकि शेखावाटी लाइन का चना ₹5580 पर बोला गया। अकोला में भाव ₹5775, नागपुर में ₹5675, रायपुर महाराष्ट्र लाइन ₹5800 तथा इंदौर में कांटावाला नया चना ₹5750 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। काबुली चने के बाजार में बेहतर क्वालिटी की मांग बनी हुई है। 42-44 काउंट काबुली चना ₹9800 प्रति क्विंटल तथा 58-60 काउंट ₹7400 पर कोट किया गया। आयातित चने में ऑस्ट्रेलियन चना कांडला पोर्ट पर ₹5500 और मुंद्रा पोर्ट पर ₹5475 तक बोला गया, जबकि तंजानिया चना ₹5200 तक रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चने के भाव स्थिर से मजबूत रहे। ऑस्ट्रेलियन बल्क वेसल मई-जून डिलीवरी के लिए 545 डॉलर प्रति टन पर कोट हुआ, जबकि कंटेनर अप्रैल-मई डिलीवरी 590 डॉलर तक रही। तंजानिया मुंबई मई डिलीवरी का भाव 555 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया। राजकोट यार्ड में देसी चने की नई आवक बेहद सीमित रही। गुजरात-3 क्वालिटी के भाव ₹1020 से ₹1040 प्रति 20 किलो और सुपर-3 क्वालिटी ₹1040 से ₹1060 प्रति 20 किलो तक बोली गई। वहीं कांटावाड़ा क्वालिटी के भाव ₹1050 से ₹1150 प्रति 20 किलो तक पहुंचे। सफेद चने की नई आवक भी कमजोर रही, जहां बीटकी क्वालिटी ₹1000 से ₹1060 तथा वीटू क्वालिटी ₹1140 से ₹1220 प्रति 20 किलो तक बिकती रही। काबुली चने में अच्छी क्वालिटी का रुझान मजबूत बना रहा। एवरेज माल ₹1350 से ₹1600 प्रति 20 किलो और सुपर क्वालिटी ₹1650 से ₹1740 प्रति 20 किलो तक बोली गई। राजकोट में मिल कंडीशन चना ₹5650 पर रहा, जबकि कंपनियों की खरीद 8 दिन भुगतान शर्त के साथ ₹5425 और मिलर-स्टॉकिस्ट खरीद ₹5450 तक दर्ज की गई। राजस्थान सरकार के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार राज्य में इस बार चने का उत्पादन लगभग 17 प्रतिशत बढ़कर 24.52 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष यह 21.01 लाख टन था। बढ़े हुए रकबे का असर अब उत्पादन आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है, जिससे मंडियों में सप्लाई को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है। कुल मिलाकर बाजार में फिलहाल सप्लाई का दबाव जरूर है, लेकिन मजबूत मांग और सीमित बिकवाली के कारण आगे बड़ी गिरावट की संभावना कम दिखाई दे रही है।