सीमित स्टॉक से सोयाबीन बाजार को सहारा, ₹8000 के स्तर पर नजर
सोयाबीन बाजार में पिछले कुछ दिनों से दबाव का माहौल बना हुआ है, लेकिन उपलब्ध स्टॉक कम होने के कारण बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है। सोयामील की मजबूती और घरेलू बाजार में सीमित उपलब्धता अब भी कीमतों को सहारा दे रही है। हालांकि निर्यात सौदों के रद्द होने तथा अफ्रीकी देशों से सोयाबीन आयात की खबरों ने तेजी की रफ्तार को कुछ समय के लिए धीमा कर दिया है। महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में अमरावती में सोयाबीन 50 रुपये की गिरावट के साथ 7200 रुपये, बरशी 7400 रुपये, वाशिम 7200 रुपये तथा खामगांव 100 रुपये मंदा होकर 7300 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार करता देखा गया। वहीं मध्य प्रदेश में उज्जैन 50 रुपये की तेजी के साथ 7300 रुपये, इंदौर 50 रुपये कमजोर होकर 7250 रुपये, अशोकनगर 7300 रुपये तथा करेली 100 रुपये की गिरावट के साथ 9000 रुपये पर बोला गया। किर्ती प्लांट लाइन में सोलापुर, लातूर, कुशनूर और हिंगोली सभी केंद्रों पर भाव 50 रुपये मजबूत होकर 7800 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए। तकनीकी दृष्टि से किर्ती प्लांट 7750 रुपये के पुराने रेजिस्टेंस के ऊपर बना हुआ है, जिससे बाजार का रुख अभी सकारात्मक माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार 8000 रुपये का स्तर निकट भविष्य का प्रमुख रेजिस्टेंस है। यदि इस स्तर के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट मिलता है तो नई तेजी का दौर शुरू हो सकता है, जबकि असफलता की स्थिति में मुनाफावसूली बढ़ने की संभावना रहेगी। अन्य प्रमुख प्लांटों में एबिस बदनावर 7200 रुपये, प्रेस्टिज 7200 रुपये, धानुका 75 रुपये कमजोर होकर 7325 रुपये, डीसान 25 रुपये मजबूत होकर 7610 रुपये, अरिहंत 50 रुपये की तेजी के साथ 7550 रुपये तथा नारायण एग्रो 7450 रुपये पर स्थिर रहे। सोया तेल बाजार में भी हल्की मजबूती दर्ज की गई। कांडला में रिफाइंड सोया तेल 1465 रुपये, मुंबई 1520 रुपये तथा हल्दिया 5 रुपये की तेजी के साथ 1470 रुपये प्रति 10 किलो रहा। प्लांट ऑयल बाजार में डीसान 1510 रुपये, शालीमार 1515 रुपये तथा धानुका 1485 रुपये पर मजबूती के साथ कारोबार करता देखा गया। सोयामील बाजार में मिश्रित रुख रहा। धनराज लातूर 500 रुपये की तेजी के साथ 65,500 रुपये प्रति टन पर पहुंचा, जबकि ओमश्री धूलिया 500 रुपये कमजोर होकर 64,500 रुपये प्रति टन पर रहा। अन्य प्रमुख मिलों के भाव लगभग स्थिर बने रहे। मौलिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल महीने में देशभर में सोयाबीन की आवक घटकर लगभग 4 लाख टन रह गई। अक्टूबर से अप्रैल के बीच कुल आवक 67.5 लाख टन दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13 प्रतिशत कम है। इसी दौरान कुल क्रशिंग 65.5 लाख टन रही, जो सालाना आधार पर 7 प्रतिशत कम है। अप्रैल अंत तक देश में उपलब्ध सोयाबीन स्टॉक 43.81 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष से करीब 19 प्रतिशत कम है। यही सीमित उपलब्धता बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। वैश्विक स्तर पर ब्राजील और दक्षिण अमेरिका में रिकॉर्ड उत्पादन के कारण आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। वहीं भारत द्वारा अफ्रीकी देशों से सोयाबीन आयात शुरू किए जाने की खबरें भी आगे चलकर घरेलू बाजार पर दबाव बना सकती हैं। दूसरी ओर कमजोर मानसून की आशंका सोयाबीन के लिए समर्थनकारी कारक मानी जा रही है, जबकि बेहतर वर्षा और बढ़े हुए बुवाई क्षेत्र की स्थिति में तेजी सीमित रह सकती है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मानसून की प्रगति, खरीफ बुवाई, वैश्विक तेल बाजार की चाल तथा अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। तकनीकी रूप से 7600 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट जबकि 8000 रुपये प्रमुख रेजिस्टेंस बना हुआ है। फिलहाल दीर्घकालिक आधार मजबूत दिखाई देता है, लेकिन निकट अवधि में बाजार का रुख मानसून और नई फसल की संभावनाओं से तय होगा।