केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन, दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज़

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आज केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आधिकारिक आगमन की घोषणा की है। इसके साथ ही मानसून लक्षद्वीप के पूरे क्षेत्र, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों तथा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई भागों में आगे बढ़ गया है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून को केरल पहुंचता है, लेकिन इस वर्ष इसका आगमन तीन दिन की देरी से हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा वर्तमान में अरब सागर से होकर मंगलुरु, उधगमंडलम (ऊटी), कोडाइकनाल, तूतिकोरिन और बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। अगले दो से तीन दिनों के दौरान इसके गोवा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के और हिस्सों, तमिलनाडु के शेष क्षेत्रों तथा पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। पिछले दो दिनों में दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर संवहनीय बादलों की गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। निचले वायुमंडलीय स्तरों पर पश्चिमी हवाओं की गति 20 से 25 नॉट तक पहुंच गई है तथा केरल में व्यापक वर्षा के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। मानसून के आगे बढ़ने से दक्षिण और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। इससे गर्मी से राहत मिलेगी और खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी।

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