मक्का बाजार में संतुलन का दौर, न तेजी हावी न मंदी का दबाव
मक्का बाजार पिछले कुछ दिनों से सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। श्रावण माह के कारण पोल्ट्री सेक्टर की मांग सामान्य से कुछ धीमी हुई है, वहीं 31 जुलाई से शुरू होने वाली तेलंगाना MARKFED की लगभग 10.98 लाख टन मक्का ई-नीलामी से पहले बड़े खरीदार भी नई खरीद में सतर्कता बरत रहे हैं। दूसरी ओर किसानों की बिकवाली सीमित रहने से बाजार पर अतिरिक्त दबाव नहीं बन पा रहा, जिससे भाव फिलहाल स्थिर बने हुए हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में कारोबार सामान्य रहा। दक्षिण भारत के एथेनॉल, स्टार्च और फीड उद्योग लगातार खरीद बनाए हुए हैं, जो बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। यही वजह है कि मांग में कुछ सुस्ती के बावजूद बाजार में बड़ी कमजोरी देखने को नहीं मिल रही है। आगे की तस्वीर पर नजर डालें तो मक्का के फंडामेंटल अभी भी पूरी तरह कमजोर नहीं हुए हैं। कई राज्यों में खरीफ मक्का की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने की संभावना है, जबकि कुछ क्षेत्रों में मानसून की देरी से नई फसल की आवक भी सामान्य से देर से शुरू हो सकती है। ऐसे में सितंबर से पहले बाजार पर अतिरिक्त आपूर्ति का दबाव सीमित रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मक्का वायदा पर मौसम और कच्चे तेल की चाल का असर देखने को मिला है। हालांकि वैश्विक संकेत मिश्रित हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय बाजार की दिशा घरेलू मांग, उद्योगों की खरीद और तेलंगाना नीलामी के परिणामों पर अधिक निर्भर करेगी। 15 दिन का मार्केट आउटलुक अगले दो सप्ताह में बाजार की दिशा मुख्य रूप से तेलंगाना MARKFED की ई-नीलामी, उसकी औसत बोली, एथेनॉल उद्योग की खरीद, पोल्ट्री सेक्टर की मांग और खरीफ फसल की प्रगति से तय होगी। यदि नीलामी में अपेक्षा से कमजोर बोलियां आती हैं तो बाजार में ₹30–50 प्रति क्विंटल तक की सीमित नरमी संभव है। वहीं कम बुवाई, सीमित पुराना स्टॉक और उद्योगों की निरंतर खरीद बड़ी गिरावट की संभावना को फिलहाल सीमित रखते हैं। हमारा मानना है कि अगस्त के दौरान मक्का बाजार सीमित दायरे में ₹50–100 प्रति क्विंटल की तेजी-मंदी के साथ कारोबार कर सकता है। नई फसल की आवक बढ़ने के बाद ही बाजार की अगली स्पष्ट दिशा सामने आने की संभावना है। व्यापारिक सलाह: जिन किसानों और व्यापारियों के पास पुराने स्टॉक हैं, वे तेजी आने पर चरणबद्ध मुनाफावसूली पर विचार कर सकते हैं। वहीं नियमित उपभोक्ताओं के लिए हल्की कमजोरी खरीदारी का अवसर बन सकती है।