सोयाबीन बाजार में लौटी तेजी, कीर्ति प्लांट ने बढ़ाए ₹100 प्रति क्विंटल भाव
पिछले कुछ दिनों की गिरावट के बाद घरेलू सोयाबीन बाजार में दोबारा मजबूती के संकेत मिलने लगे हैं। महाराष्ट्र के प्रमुख कीर्ति प्लांट पर जुलाई के मध्य में सोयाबीन का भाव ₹7,950 प्रति क्विंटल तक पहुंचा था। इसके बाद मांग कमजोर होने और खरीदारों की सुस्ती के कारण भाव लगभग ₹550 टूटकर ₹7,400 प्रति क्विंटल तक आ गए। हालांकि 29 जुलाई को प्लांट ने खरीद भाव में ₹100 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की, जिससे भाव फिर ₹7,500 प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। यह संकेत देता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी फिर से सक्रिय हो रही है। महाराष्ट्र के कीर्ति प्लांट पर वर्तमान खरीद भाव ₹7,500 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की प्रमुख मंडियों में भी गुणवत्ता के अनुसार सोयाबीन के भाव लगभग ₹6,700-₹7,150 प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार कर रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले माल की मांग सामान्य से बेहतर बनी हुई है, जबकि कमजोर गुणवत्ता वाले माल पर सीमित खरीद देखने को मिल रही है। 24 जुलाई तक देश में लगभग 113.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष के 117.25 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। यदि अगस्त में मानसून सामान्य रहता है तो फसल की स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन कमजोर वर्षा उत्पादन पर दबाव बना सकती है। दूसरी ओर, चालू तेल वर्ष में सोयाबीन आयात और खाद्य तेलों की उपलब्धता घरेलू बाजार की तेजी को सीमित कर सकती है। ब्राजील और अमेरिका में पर्याप्त स्टॉक तथा वैश्विक आपूर्ति फिलहाल संतुलित बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अभी किसी बड़ी तेजी के संकेत नहीं हैं, लेकिन मौसम से जुड़ी किसी भी प्रतिकूल खबर का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। तकनीकी और मौलिक संकेतों को देखते हुए बाजार फिलहाल सावधानी के साथ सकारात्मक (Cautiously Bullish) दिखाई दे रहा है। यदि कीर्ति प्लांट और अन्य प्रमुख प्रोसेसरों की खरीद मजबूत रहती है तथा किसानों की बिक्री सीमित रहती है, तो आने वाले 10-20 दिनों में सोयाबीन के भाव में ₹200-₹300 प्रति क्विंटल तक की और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि मंडियों में आवक अचानक बढ़ती है या वैश्विक बाजार कमजोर होता है, तो बाजार फिर से दबाव में आ सकता है। फिलहाल बाजार ने निचले स्तरों से अच्छी रिकवरी दिखाई है और व्यापारिक धारणा पहले की तुलना में मजबूत हुई है। आने वाले दिनों में मानसून, मंडी आवक, प्लांट खरीद और वैश्विक बाजार की चाल ही सोयाबीन की अगली दिशा तय करेगी। व्यापार एवं निवेश से जुड़े सभी निर्णय अपने विवेक और जोखिम क्षमता के अनुसार ही लें।