कपास बाजार में जबरदस्त तेजी, मिलों की लिवाली से कीमतों में बड़ा उछाल
कपास और रुई के घरेलू बाजार में कम बारिश के चलते उत्पादन घटने की आशंका और स्पिनिंग मिलों की मजबूत मांग के कारण जबरदस्त तेजी का रुख देखा जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में रुई की कीमतों में ₹3,000 से ₹4,000 प्रति कैंडी तक का भारी उछाल आया है, जिससे गुजरात में शंकर-6 रुई का भाव ₹68,000 प्रति कैंडी के स्तर को छू गया है। बेहतर मुनाफे और ऊंचे दामों की उम्मीद में किसानों द्वारा अपनी उपज की बिक्री को फिलहाल होल्ड करने से भी बाजार की कीमतों को मजबूत समर्थन मिल रहा है। नए कपास सीजन के शुरुआती नौ दिनों में देशभर में लगभग 5 लाख गांठ की धीमी आवक दर्ज की गई है, जिसमें दैनिक आवक करीब 78,000 गांठ रही है। इसमें उत्तर भारत से 17,000, मध्य प्रदेश से 16,000, गुजरात से 15,000, कर्नाटक से 9,000, आंध्र प्रदेश से 8,000, महाराष्ट्र से 7,000 और तेलंगाना से 6,000 गांठ शामिल हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर दिसंबर और मार्च के वायदा अनुबंधों में तेजी तथा भारतीय कपास निगम द्वारा स्टॉक नीलामी कीमतों में ₹500 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी ने भी घरेलू धारणा को मजबूत किया है। स्पिनिंग मिलों की ओर से निरंतर बनी बेहतर मांग और सीमित आपूर्ति के चलते हाजिर बाजारों में कीमतों में तेजी बरकरार है। वर्तमान में रायचूर में कपास के हाजिर भाव ₹9,700 और तेलंगाना में लगभग ₹9,200 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि जैसे-जैसे मंडियों में नई फसल की आवक में तेजी आएगी और वैश्विक स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव होगा, बाजार में कुछ हद तक अस्थिरता देखने को मिल सकती है। व्यापारियों और किसानों के लिए यह समय बेहद सावधानी से कदम उठाने का है। किसानों के लिए सलाह है कि वे बाजार की तेजी का लाभ उठाने के लिए एक साथ पूरी फसल बेचने के बजाय टुकड़ों में (चरणबद्ध तरीके से) अपनी उपज बेचें ताकि जोखिम कम हो। वहीं, स्पिनिंग मिल मालिकों और व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय रुझानों, सीसीआई की नीलामी दरों और आने वाले दिनों में आवक बढ़ने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही अपनी खरीद और स्टॉक प्रबंधन की रणनीति तय करनी चाहिए।